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2017 की विजयदशमी: जब जमुई में हालात बिगड़े, लेकिन नेतृत्व ने बचाई शांति


2017 की विजयदशमी: जब जमुई में हालात बिगड़े, लेकिन नेतृत्व ने बचाई शांति

साल 2017 की बात है, जब वीर कुंवर सिंह दुर्गा पूजा सेवा समिति की मूर्ति का विसर्जन बोधवन तालाब में करना लगभग असंभव हो गया था। प्रशासन ने उस समय किसी दूसरी जगह मूर्ति विसर्जन करने का आदेश दे दिया था, जिससे पूरे शहर में तनाव का माहौल बन गया था। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी थी, क्योंकि वर्षों से मूर्ति विसर्जन बोधवन तालाब में ही किया जाता रहा था।

यह पूरा मामला 2017 की विजयदशमी से जुड़ा हुआ है। उस समय जमुई शहर में हालात बेहद संवेदनशील हो गए थे। कई जगहों पर तनाव बढ़ गया था, कुछ दुकानों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई थीं। दोनों तरफ से कुछ असामाजिक तत्व माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे थे और स्थिति को हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक दंगे का रूप देने की साजिश रची जा रही थी।

लेकिन उसी समय समाजवादी विचारधारा के नेता स्वर्गीय नरेंद्र सिंह के बड़े पुत्र और पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रशासन और जमुई के एसपी के साथ मिलकर हालात को संभालने की जिम्मेदारी उठाई। अजय प्रताप सिंह खुद शहर के अलग-अलग मोहल्लों में पहुंचे और हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने लोगों को समझाया कि कुछ असामाजिक तत्व शहर का माहौल खराब करना चाहते हैं, लेकिन हमें उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देना है। उनके प्रयास से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के बुद्धिजीवी एक मंच पर आए और आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया। धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे और अंततः मूर्ति विसर्जन बोधवन तालाब में ही शांतिपूर्वक किया गया।

अजय प्रताप सिंह हमेशा सभी धर्मों का सम्मान करने वाले नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। चाहे ताजिया का जुलूस हो, रामनवमी की शोभायात्रा हो या विजयदशमी का जुलूस — उन्होंने हर धार्मिक कार्यक्रम में समान सम्मान और सहयोग की भावना दिखाई।


वर्तमान राजनीति पर उठते सवाल

अब अगर वर्तमान विधायक श्रेयसी सिंह की बात करें, तो लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि उन्होंने पटना में धार्मिक जुलूसों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, लेकिन जमुई में सनातन प्रेमियों को पूरे 12 महीने तैयारी करने के बावजूद रामनवमी की शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं मिल सकी।

लोगों का कहना है कि प्रशासन ने सनातन प्रेमियों की तैयारी को सफल नहीं होने दिया और यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नेताओं का रवैया अलग-अलग जगहों पर अलग होता है। अब जमुई की जनता और सनातन प्रेमियों के सामने यह समय है कि वे सच्चाई को समझें और अपनी आवाज बुलंद करें।

डर और दिखावे से बेहतर है कि लोग आत्मसम्मान के साथ खड़े हों और सही के लिए आवाज उठाएं।


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