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पटना में गर्ल्स हॉस्टल्स की आड़ में चल रहे अवैध नेटवर्क का खुलासा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पटना में गर्ल्स हॉस्टल्स की आड़ में चल रहे अवैध नेटवर्क का खुलासा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

बिहार की राजधानी पटना से सामने आई एक सनसनीखेज जांच ने गर्ल्स हॉस्टल्स की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में दावा किया गया है कि कुछ हॉस्टल्स में शिक्षा के नाम पर लड़कियों को रखा जाता है, लेकिन पर्दे के पीछे वहां एक संगठित अवैध नेटवर्क सक्रिय है।

जांच के दौरान ऐसे एजेंट्स सामने आए हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम यह स्वीकार करते हैं कि लड़कियों की उम्र और शारीरिक बनावट के आधार पर रकम तय की जाती है। आरोप है कि कम उम्र की लड़कियों के लिए ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं और असली उम्र छिपाने के लिए फर्जी पहचान पत्र तक बनवाए जाते हैं।

एजेंट्स का दावा है कि पूरा सिस्टम योजनाबद्ध तरीके से काम करता है, जिसमें पैसे तभी लिए जाते हैं जब लड़की ग्राहक तक पहुंच जाती है। दिन के समय भेजने और तय समय पर वापस लाने की शर्त रखी जाती है, ताकि किसी तरह का शक न हो।

इस पूरे मामले में हॉस्टल वार्डन की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि मामूली रकम देकर कुछ वार्डन को “मैनेज” कर लिया जाता है, जिससे यह अवैध गतिविधि लंबे समय तक चलती रहती है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कई लड़कियां वास्तव में पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हॉस्टल में दाखिला लेती हैं। लेकिन बाद में उन्हें धीरे-धीरे इस अवैध धंधे में धकेलने की कोशिश की जाती है। विरोध करने पर मानसिक दबाव, धमकी और लालच का सहारा लिया जाता है।

पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा से जुड़ा मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और हॉस्टल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई एक हॉस्टल या एक घटना तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। खुफिया कैमरों में रिकॉर्ड हुए फुटेज और बयानों में एजेंट्स, कुछ वार्डन और लड़कियों ने कथित तौर पर इस अवैध गतिविधि की पुष्टि की है।

यह मामला केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो पढ़ाई और सपनों के नाम पर आने वाली और भी मासूम बेटियां इस दलदल में फंस सकती हैं। अब सवाल यह है कि ऐसे एजेंट्स और पूरे नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई कब होगी?

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