जमुई में बड़ी लूट कांड के बाद पुलिस प्रशासन का कड़ा एक्शन
गिद्धौर थानाध्यक्ष दीनानाथ सिंह निलंबित, जयप्रकाश सिंह को सौंपी गई कमान
जमुई।
जिले के गिद्धौर थाना क्षेत्र में थाना के ठीक सामने रिटायर्ड सिविल सर्जन सह मुंगेर प्रमंडल के आरडीडी डॉ. विजेंद्र सत्यार्थी के आवास पर दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज लूट की घटना ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए गिद्धौर थाना प्रभारी दीनानाथ सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
एसपी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान दीनानाथ सिंह को पुलिस लाइन, जमुई में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। वहीं, गिद्धौर थाना में पदस्थापित एसआई जयप्रकाश सिंह को थाना के दैनिक कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बेहोशी का इंजेक्शन देकर लूट की गई वारदात
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार की सुबह हथियारबंद अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। अपराधियों ने डॉ. विजेंद्र सत्यार्थी, उनके पुत्र डॉ. विक्रम सत्यार्थी और पुष्पम कुमारी को बेहोशी का इंजेक्शन देकर असहाय बना दिया और इसके बाद घर में रखे नकदी व कीमती सामान की लूट कर फरार हो गए।
बताया जा रहा है कि इस घटना में करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई है, हालांकि पुलिस द्वारा अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि की जा रही है।
थाना के सामने हुई घटना से पुलिस व्यवस्था पर सवाल
इस लूट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरी घटना गिद्धौर थाना के ठीक सामने घटित हुई, जिससे जिले की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिनदहाड़े इतनी बड़ी वारदात का होना पुलिस की गश्ती व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
लगातार बढ़ते अपराध और इस हाई-प्रोफाइल लूट कांड ने पुलिस प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
अब निगाहें जांच और खुलासे पर
एसपी विश्वजीत दयाल द्वारा की गई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि पुलिस प्रशासन इस मामले को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस कांड के खुलासे में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती है, और अपराधियों को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचाया जाता है।













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