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Student Credit Card: घोटाले की आग अब सुलगने लगी है

Student Credit Card: घोटाले की आग अब सुलगने लगी है

Bihar Student Credit Card Scam की आग अब साफ़ दिखाई देने लगी है। भले ही सच्चाई सामने आने में वक्त लगे, और इस बीच कितना ही सरकारी धन लुट जाए, लेकिन यह तय है कि इस घोटाले का भांडा फूटेगा। फिलहाल इस सुलगती आग का असर यह हुआ है कि सरकार ने अपनी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं। सरकार पहले इस योजना की राशि बढ़ाने पर विचार कर रही थी, यह मानकर कि पढ़ाई महंगी हो गई है। लेकिन अब इस फैसले को टाल दिया गया है। पहले यह जानने की कोशिश होगी कि अब तक दी गई मदद का असल हिसाब-किताब क्या है और वह पैसा वास्तव में किन तक पहुँचा। सच्चाई जानना बहुत मुश्किल नहीं है।

अच्छे संस्थान भी हैं, लेकिन फर्जी संस्थानों का प्रतिशत कथित तौर पर 90% तक पहुँच चुका है। बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार की नीयत पर सवाल नहीं है—अगर कोई स्वयं जांच करना चाहे तो सच्चाई सामने आ सकती है। तरीका बेहद सरल है। संस्थानों की सूची अपने पास रखें, गोपनीय रखें। किसी कार्यदिवस में, बिना पूर्व सूचना दिए, रास्ते में पड़ने वाले किसी शैक्षणिक संस्थान में पहुँच जाएँ। वहाँ नामांकन रजिस्टर में दर्ज नामों का आधार कार्ड से मिलान कर लें। हॉस्टल का निरीक्षण करें। एक ही कैंपस में कितने नामों से संस्थान चल रहे हैं, कितने तरह के कोर्स कागज़ों पर दर्ज हैं—सब कुछ साफ़ दिखाई देगा। दिल्ली प्रवास के दौरान एक दिन JNU के ढाबे पर जाने का अवसर मिला।

वहाँ देश-विदेश के हर विषय पर गंभीर बहसें होती हैं। बिहार के कई शोधार्थियों से बातचीत हुई। सभी का मानना था कि Student Credit Card का मुद्दा बिल्कुल सही उठाया गया है। नीतीश कुमार ने योजना की शुरुआत अच्छी नीयत से की थी, लेकिन “साँड़ गिरोह” ने इसे इस कदर निगल लिया कि असली लाभार्थी हाशिये पर चले गए। स्थिति यह है कि बिहार में अब अच्छे निजी स्कूल खुलने के बजाय ऐसे कॉलेज खुल रहे हैं, जिनका उद्देश्य शिक्षा नहीं बल्कि Student Credit Card के पैसों की लूट है। वजह साफ़ है—स्कूल में अभिभावक सजग रहते हैं, हर महीने फीस देनी होती है। लेकिन इन कॉलेजों की बुनियाद ही सरकारी धन पर टिकी होती है। यहाँ पढ़ाई और परीक्षा से ज़्यादा “सर्टिफिकेट” का माइंडसेट है। दलाल छात्रों को लाकर दाखिला करा देते हैं। SPMU, DRCC, अलग-अलग काउंसिल, विश्वविद्यालय—सब कागज़ों पर सेट रहते हैं। टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की फाइलें पूरी होती हैं, लेकिन पढ़ाने कोई नहीं आता। खर्च के नाम पर घूस के अलावा कुछ नहीं। एक व्हिसलब्लोअर ने फर्जी संस्थान खोलने से लेकर अगले पाँच वर्षों तक की संभावित कमाई का पूरा खाका भेजा है।

खर्च बेहद कम और मुनाफा सरकारी धन की लूट से 20 से 50 करोड़ रुपये तक। अगर खेल समझ में आ गया और संस्थान कागज़ों पर ही फैलते चले गए, तो 100 करोड़ भी छोटी रकम लगती है। पिछले 24 घंटों में और भी कई ई-मेल प्राप्त हुए हैं। कुछ निजी चैट्स सामने आई हैं, जो बेहद चौंकाने वाली हैं। अब लोग खुले तौर पर सबसे ज़्यादा भ्रष्ट संस्थानों के नाम लेने लगे हैं। आप भी अपनी जानकारी gyaneshwarlive@gmail.com पर भेजते रहें—आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। SPMU से जुड़े कुछ नाम, गर्दनीबाग, और कई चर्चित चेहरे—इनकी कहानी और कमाई से बिहार अनजान नहीं है। वैशाली के एक कुख्यात संस्था समूह से जुड़े कुछ एजेंट छात्रों को बहला-फुसलाकर दाखिला दिलाने का ठेका संभालते हैं। इनकी कमाई की सच्चाई शायद आप सुन भी न सकें।

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