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नवजात शिशु को जन्म देने के कुछ घंटों बाद परीक्षा देने पहुंची छात्रा, बनी नारी सशक्तिकरण और शिक्षा के प्रति अटूट संकल्प की मिसाल

नवजात शिशु को जन्म देने के कुछ घंटों बाद परीक्षा देने पहुंची छात्रा, बनी नारी सशक्तिकरण और शिक्षा के प्रति अटूट संकल्प की मिसाल

जमुई (बिहार):
जिले के सोनो प्रखंड से नारी सशक्तिकरण, आत्मबल और शिक्षा के प्रति दृढ़ निश्चय की एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। प्रसव पीड़ा, शारीरिक कमजोरी और नवजात शिशु की जिम्मेदारी के बावजूद एक छात्रा ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया और बच्चे को जन्म देने के महज कुछ ही घंटों बाद परीक्षा केंद्र पहुंचकर परीक्षा में शामिल हुई।

यह प्रेरणादायक छात्रा खुशबू कुमारी, उत्क्रमित उच्च विद्यालय पाण्डेयडीह की छात्रा हैं। शुक्रवार की सुबह लगभग सात बजे खुशबू ने सोनो स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक स्वस्थ नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद चिकित्सकों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी थी। परिजन भी उनकी नाजुक हालत को देखते हुए परीक्षा छोड़ देने के पक्ष में थे, लेकिन खुशबू का आत्मविश्वास और शिक्षा के प्रति समर्पण अडिग रहा।

खुशबू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मेहनत और भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” उनका मानना था कि शिक्षा ही आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन का सबसे मजबूत आधार है। इसी सोच के साथ उन्होंने साहसिक निर्णय लिया और नवजात शिशु को अपने साथ लेकर परीक्षा देने का निश्चय किया।

कुछ ही घंटों के भीतर वह प्लस टू राज संपोषित विद्यालय, सोनो स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचीं और परीक्षा में शामिल हुईं। परीक्षा केंद्र पर यह दृश्य देखकर शिक्षक, कर्मचारी और अन्य परीक्षार्थी कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध रह गए। कमजोर शारीरिक स्थिति के बावजूद खुशबू के चेहरे पर आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प साफ झलक रहा था।

परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षक लक्ष्मीकांत पांडे ने छात्रा की स्थिति को समझते हुए उन्हें हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई, ताकि वह बिना किसी परेशानी के परीक्षा दे सकें। परीक्षा केंद्र में मौजूद लोगों ने खुशबू के साहस और जज्बे की खुले दिल से सराहना की।

खुशबू कुमारी की यह कहानी आज के समाज में महिलाओं की क्षमता, इच्छाशक्ति और संघर्ष की सशक्त मिसाल बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी परिस्थिति लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। यह घटना न केवल छात्राओं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो नारी सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है।

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