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बिहार में हीटवेव का खतरा: तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने की आशंका, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी


बिहार में हीटवेव का खतरा: तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने की आशंका, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

बिहार में आने वाले दिनों में भीषण गर्मी और लू (हीट वेव) का खतरा बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इसी को देखते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य भर में संभावित हीट वेव से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

बुधवार को इस मुद्दे पर एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने की। बैठक में सदस्य पी.एन. राय, कौशल किशोर मिश्र और सचिव मो. वारिस खान समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


अप्रैल में बढ़ेगा तापमान, दक्षिण बिहार में 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना

बैठक में प्रस्तुत मौसमीय विश्लेषण के अनुसार इस साल अप्रैल महीने में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है। राज्य के कई जिलों में तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि दक्षिणी बिहार के कुछ हिस्सों में यह 40 डिग्री के करीब जाने की आशंका व्यक्त की गई है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि 17 से 23 अप्रैल के बीच एक बार फिर तापमान में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं मई महीने में गर्मी और भी अधिक खतरनाक रूप ले सकती है। इसी कारण अभी से सभी विभागों को सतर्क रहने और ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।


स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश: हीट स्ट्रोक के मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग होगी मजबूत

बैठक में स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि हीट वेव से जुड़ी बीमारियों की पहचान, इलाज और रिपोर्टिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। भारत सरकार के मानकों के अनुसार हीट स्ट्रोक की पहचान और प्रमाणन प्रक्रिया लागू करने पर जोर दिया गया है।

साथ ही जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और जीविका दीदियों को प्रशिक्षण देने का फैसला लिया गया है, ताकि शुरुआती स्तर पर ही मरीजों की पहचान की जा सके। यह भी माना गया कि अभी हीट वेव से जुड़े कई मामलों की रिपोर्टिंग कम हो रही है, जिसे सुधारने के लिए डिजिटल पोर्टल और डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा।


किसानों के लिए भी तैयारी: फसलों को बचाने के लिए विशेष योजना

गर्मी और लू का असर सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि खेती और किसानों की आजीविका पर भी पड़ सकता है। इसलिए कृषि विभाग को निर्देश दिया गया है कि किसानों को फसलों में नमी बनाए रखने, सही बीजों का चयन करने और जल प्रबंधन के बेहतर उपाय अपनाने के लिए जागरूक किया जाए।

उच्च तापमान को सहन करने वाली फसल किस्मों को बढ़ावा देने और बीज निगम के माध्यम से समय से पहले बीज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। पंचायत स्तर पर किसान चौपाल के जरिए जागरूकता अभियान चलाने और किसानों को पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई गई है।


खराब चापाकलों की जल्द मरम्मत, जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान होगी

जल संसाधन विभाग को यह निर्देश दिया गया है कि राज्य भर के सभी चापाकलों की स्थिति को तुरंत ठीक किया जाए और जो चापाकल खराब हैं, उनकी मरम्मत जल्द से जल्द कराई जाए। इसके अलावा संभावित जल संकट वाले इलाकों की पहचान कर वहां पहले से ही वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था करने को कहा गया है।

जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और वैकल्पिक जल स्रोतों पर भी विशेष जोर दिया गया है। तकनीकी नवाचार के तहत दूर-दराज के इलाकों में ड्रोन के माध्यम से पानी पहुंचाने, रीयल-टाइम डैशबोर्ड, मोबाइल ऐप और कॉल सेंटर जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं का भी इस्तेमाल किया जाएगा।


15 अप्रैल को होगी अगली बड़ी समीक्षा बैठक

बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी संबंधित विभाग अगले 15 दिनों के अंदर अपनी-अपनी तैयारियों की प्रगति सुनिश्चित करें। इसके बाद 15 अप्रैल को एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अब तक किए गए कामों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

बैठक का संचालन वरीय शोध पदाधिकारी दीपक कुमार ने किया। अंत में प्राधिकरण ने विश्वास जताया कि यदि सभी विभाग मिलकर गंभीरता से काम करें, तो इस साल हीट वेव के खतरे से लोगों को काफी हद तक बचाया जा सकता है और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।


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