घर से निकलती थी दो स्टार लगी वर्दी में, नामपट्टी पर ‘निशु सिंह’; बेगूसराय में फर्जी लेडी दारोगा का भंडाफोड़
बेगूसराय। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के संतनगर मोहल्ले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने खुद को महिला दारोगा बताकर लोगों से ठगी करने वाली एक युवती को गिरफ्तार किया है। आरोपित युवती की पहचान मटिहानी थाना क्षेत्र के छितरौर खोरमपुर निवासी विपिन सिंह की पुत्री काजोमा कुमारी के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से दो स्टार लगी पुलिस वर्दी और ‘निशु सिंह’ नाम की दो नेमप्लेट बरामद की हैं।
किराए के मकान से चल रहा था फर्जीवाड़ा
जानकारी के अनुसार, काजोमा कुमारी करीब चार महीने पहले संतनगर निवासी कैलाश साह के मकान में किराए पर रहने आई थी। मोहल्ले में उसने खुद को कोर्ट में पदस्थापित दारोगा बताया था। इतना ही नहीं, लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए वह अपने पति को सेना में कार्यरत बताती थी। वर्दी पहनकर घर से निकलना और नेमप्लेट के साथ रौब दिखाना उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था, जिससे स्थानीय लोगों को उस पर कभी शक नहीं हुआ।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वह अक्सर पुलिसिया अंदाज में बात करती थी और जरूरतमंद लोगों को भरोसा दिलाती थी कि वह उनके मामलों में पैरवी करवा सकती है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर वह लोगों से पैसे ऐंठ लेती थी।
ऐसे खुली पोल
सोमवार सुबह मामला तब खुला जब ठगी के शिकार कई लोग एक साथ उसके किराए के मकान पर पहुंच गए और अपने पैसे वापस करने की मांग करने लगे। बातचीत के दौरान लोगों ने उससे उसका पहचान पत्र दिखाने को कहा। जब वह कोई वैध पहचान पत्र नहीं दिखा सकी, तो लोगों का संदेह गहरा गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मुफस्सिल थाना पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान जब उसके दावों की पुष्टि नहीं हो सकी, तो पुलिस ने कमरे की तलाशी ली। तलाशी में दो स्टार लगी पुलिस वर्दी, ‘निशु सिंह’ नाम की नेमप्लेट और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हो गया कि वह किसी भी प्रकार से पुलिस विभाग से जुड़ी नहीं है।
कई लोगों से की ठगी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आरोपित महिला आधा दर्जन से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुकी थी। अनुमान है कि वह अब तक करीब 50 हजार रुपये से अधिक की ठगी कर चुकी है। संतनगर निवासी बीएसएफ के सेवानिवृत्त कर्मी नंदकिशोर चौधरी ने भी आरोप लगाया है कि महिला ने उनसे 10,500 रुपये उधार लिए थे, जिन्हें उसने वापस नहीं किया।
पीड़ितों का कहना है कि वह भरोसे का माहौल बनाकर पहले लोगों से सहानुभूति हासिल करती थी और फिर उनके काम करवाने के नाम पर पैसे ले लेती थी। कुछ लोगों को उसने कोर्ट और थाने में संपर्क होने का दावा कर कानूनी मामलों में मदद का आश्वासन दिया था।
न्यायिक हिरासत में भेजी गई
पुलिस ने आरोपित महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं उसके साथ इस फर्जीवाड़े में कोई और व्यक्ति तो शामिल नहीं था।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि केवल वर्दी और रौब देखकर किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की पहचान को लेकर संदेह होने पर संबंधित विभाग से पुष्टि अवश्य करें, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।












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