बिहार विधानसभा में आवास योजना पर घमासान: सत्तापक्ष के विधायकों ने ही सरकार को घेरा, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
पटना। बिहार विधानसभा के सत्र के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने ही अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। मुद्दा था ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आवास योजना में कथित भ्रष्टाचार और लाभार्थियों से अवैध वसूली का। सदन में उठे आरोपों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया और कुछ समय के लिए माहौल काफी गर्म हो गया।
लाभार्थियों के चयन में अनियमितता का आरोप
सत्तापक्ष के विधायक और भाजपा नेता बैद्यनाथ प्रसाद ने सदन में कहा कि आवास योजना के तहत लाभार्थियों के चयन में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनका आरोप था कि सर्वेक्षण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और विकास मित्रों की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि कई वास्तविक गरीब परिवार सूची से बाहर रह गए हैं, जबकि अपात्र लोगों के नाम शामिल कर दिए गए हैं।
बैद्यनाथ प्रसाद ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे की मांग की जा रही है। इससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है और आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
ग्रामीण विकास मंत्री का जवाब
इन आरोपों का जवाब देते हुए राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने सरकार की ओर से सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में व्यापक सर्वेक्षण कराया गया है, जिसमें लगभग 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार लोगों को चिन्हित किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह पारदर्शी है और गरीबों को आवास उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने विधायकों से अपील की कि यदि उनके पास ठोस प्रमाण हैं तो वे संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराएं, ताकि कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
25 प्रतिशत तक अवैध वसूली का आरोप
बहस को आगे बढ़ाते हुए भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर लाभुकों से आवास की स्वीकृत राशि का 25 प्रतिशत तक अवैध रूप से वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर गरीबों के अधिकारों का हनन है और इससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
इसके बाद बिहार शरीफ से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुनील कुमार ने रहुई प्रखंड का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिन लाभार्थियों के खातों में आवास की राशि पहुंच चुकी है, उनसे भी कमीशन की मांग की जा रही है। उन्होंने सदन में कहा कि इस संबंध में उनके पास वीडियो सबूत मौजूद हैं, जो कथित भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं।
जांच और कार्रवाई का आश्वासन
आरोपों के जवाब में मंत्री श्रवण कुमार ने दोहराया कि सरकार किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वीडियो या अन्य प्रमाण उपलब्ध कराए जाते हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
सदन में असहज स्थिति
जिस तरह से सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने ही सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाए, उससे सदन में सरकार की स्थिति कुछ समय के लिए असहज नजर आई। विपक्ष ने भी इस मौके पर सरकार को घेरने की कोशिश की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है।
फिलहाल, सरकार ने जांच का आश्वासन देकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच में भ्रष्टाचार के आरोप साबित होते हैं और क्या वास्तव में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।













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