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दरभंगा के हरिनगर में शांति बहाली की पहल, एसडीपीओ–एसडीओ की मौजूदगी में हुई शांति समिति बैठक

दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड अंतर्गत हरिनगर गांव में हाल ही में हुई जातीय हिंसा की घटना के पांच दिन बाद प्रशासन ने हालात को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। गुरुवार, 05 फरवरी 2026 को शांति व्यवस्था बहाल करने और गांव में सौहार्द कायम रखने के उद्देश्य से प्रशासन की ओर से शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का नेतृत्व बिरौल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) प्रभाकर तिवारी और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) शशांक राज ने किया।

शांति समिति की बैठक में गांव के दोनों पक्षों के प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। अधिकारियों ने सभी पक्षों से संयम बरतने, अफवाहों से दूर रहने और आपसी संवाद के माध्यम से शांति बनाए रखने की अपील की। बैठक के दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने आपसी सहमति से गांव में शांति और भाईचारे का माहौल बनाए रखने का भरोसा दिलाया।

एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने बैठक के बाद बताया कि जातीय तनाव को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा की घटना में शामिल वास्तविक आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने का निर्णय लिया गया है, ताकि कानून का भय बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं, अनुमंडल पदाधिकारी शशांक राज ने बताया कि गांव में एहतियातन भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और प्रशासन की नजर गांव की हर गतिविधि पर बनी हुई है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और गांव में शांति बनी हुई है।

इस बीच प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और जातीय विद्वेष को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि पूरे गांव के एक समुदाय विशेष को आरोपी बनाए जाने की बातें पूरी तरह भ्रामक और गलत हैं। उन्होंने बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं, जिनकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गांव के मुखिया और सरपंच दोनों ब्राह्मण समुदाय से हैं। इस मामले में मुखिया को आरोपी नहीं बनाया गया है, जबकि सरपंच को नामजद आरोपी बनाया गया है, जो यह दर्शाता है कि प्रशासन किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि केवल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रहा है।

अधिकारी ने आगे जानकारी दी कि लगभग तीन हजार की ब्राह्मण आबादी वाले इस गांव में अब तक केवल 70 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्राथमिकी में कुछ ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जो फिलहाल गांव से बाहर रहते हैं। ऐसे मामलों की गहन जांच की जा रही है और यदि कोई व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है तो उसका नाम प्राथमिकी से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस संबंध में राहत की बात यह है कि पीड़ित दलित समुदाय के लोग भी इस बात से सहमत हैं कि घटना से असंबद्ध और निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में नहीं फंसाया जाना चाहिए। दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में प्रशासन लगातार प्रयासरत है।

गौरतलब है कि हरिनगर गांव में यह विवाद 30 जनवरी की सुबह बकाया मजदूरी को लेकर शुरू हुआ था। पुलिस के अनुसार, मकान निर्माण कार्य की करीब चार वर्ष से बकाया मजदूरी को लेकर दो पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए जातीय तनाव में बदल गई। 31 जनवरी को दोनों पक्षों के बीच मारपीट की घटना सामने आई, जिसके बाद गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया था।

हालांकि, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, पुलिस बल की तैनाती और शांति समिति की पहल के बाद फिलहाल गांव में स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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