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जमुई की जनता अब जवाब चाहती है: वादों से आगे कब बढ़ेगा विकास?

जमुई की जनता अब जवाब चाहती है: वादों से आगे कब बढ़ेगा विकास?

जमुई लोकसभा क्षेत्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों से चर्चा का विषय रही है। कभी यह क्षेत्र बड़े-बड़े वादों और भाषणों के कारण सुर्खियों में रहा, तो कभी विकास के अधूरे सपनों की वजह से। सवाल यह है कि आखिर जमुई को उसका हक कब मिलेगा?

सांसद बदले, लेकिन हालात नहीं

जमुई लोकसभा से दो कार्यकाल तक सांसद रहे Chirag Paswan ने अपने कार्यकाल में कई मुद्दों को उठाने की बात कही। उसके बाद अब इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व उनके बहनोई Arun Bharti कर रहे हैं। दोनों नेताओं पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि उन्होंने पत्राचार और आश्वासन तो बहुत दिए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दिए।

जनता का कहना है कि सिर्फ चिट्ठियाँ लिखने से विकास नहीं होता, बल्कि ठोस पहल और परिणाम चाहिए।

रेलवे ठहराव का अधूरा सपना

जमुई रेलवे स्टेशन से दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों के लिए कई महत्वपूर्ण ट्रेनें गुजरती हैं। लेकिन विडंबना यह है कि अधिकांश ट्रेनों का यहाँ ठहराव नहीं है। केवल Purva Express का ठहराव है, जबकि अन्य प्रमुख ट्रेनों का नहीं।

हर साल लाखों मजदूर गुजरात, दिल्ली, मुंबई और अन्य राज्यों में काम करने के लिए जमुई से जाते हैं। ये लोग लोहा-पीटने, बिल्डिंग निर्माण और अन्य श्रम कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में अगर ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित होता, तो उन्हें बड़ी सुविधा मिलती। यह मुद्दा वर्षों से उठता रहा है, लेकिन समाधान अब तक अधूरा है।

पड़ोसी क्षेत्रों से तुलना

पड़ोसी क्षेत्र गोड्डा के सांसद Nishikant Dubey अक्सर अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर चर्चा में रहते हैं। उन्होंने उद्योगपतियों को अपने क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। देश के बड़े उद्योगपति Gautam Adani ने गोड्डा क्षेत्र में सीमेंट और पावर इंडस्ट्री जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की। साथ ही वहां सिंगल रेलवे लाइन को डबल करने का कार्य भी प्रगति पर बताया जाता है।

स्वाभाविक है कि जब लोग पड़ोसी क्षेत्रों में उद्योग, रेल विस्तार और रोजगार के अवसर देखते हैं, तो वे अपने क्षेत्र के लिए भी वैसी ही उम्मीद करते हैं।

केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद अपेक्षाएं अधूरी?

चिराग पासवान केंद्र सरकार में मंत्री पद पर रहे हैं। ऐसे में जनता की अपेक्षाएं और बढ़ जाती हैं। लोगों का मानना है कि यदि कोई नेता केंद्रीय स्तर पर प्रभाव रखता है, तो अपने क्षेत्र के लिए विशेष पहल कर सकता है। लेकिन जमुई के कई नागरिकों को लगता है कि अब तक अपेक्षित बड़े प्रोजेक्ट्स या बुनियादी बदलाव दिखाई नहीं दिए।

विधानसभा स्तर पर भी सवाल

जमुई से विधायक Shreyasi Singh, जो बिहार सरकार में मंत्री भी हैं, उनसे भी जनता को काफी उम्मीदें हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सदर अस्पताल में अव्यवस्था और कथित लेन-देन के वीडियो समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं।

गरीब और जरूरतमंद लोग सरकारी अस्पतालों पर निर्भर होते हैं। यदि वहां भी पारदर्शिता और संवेदनशीलता का अभाव हो, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण

लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णयकर्ता होती है। नेता चुनाव के समय वादे करते हैं, लेकिन उन वादों की निगरानी और जवाबदेही तय करना भी नागरिकों की जिम्मेदारी है।

सवाल यह नहीं कि कौन किस दल से है, बल्कि यह है कि:

  • क्या रेलवे ठहराव बढ़ा?
  • क्या उद्योग आए?
  • क्या रोजगार के अवसर बढ़े?
  • क्या अस्पताल और बुनियादी सेवाओं में सुधार हुआ?

यदि नहीं, तो जनता को संगठित होकर सवाल पूछने होंगे। माला और गुलदस्ता देने की राजनीति से आगे बढ़कर मुद्दों की राजनीति करनी होगी।

निष्कर्ष

जमुई आज भी अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यहाँ श्रमशक्ति है, युवा ऊर्जा है और संसाधन हैं। जरूरत है दूरदर्शी योजना, ठोस पहल और राजनीतिक इच्छाशक्ति की।

अब समय आ गया है कि जमुई की जनता विकास को चुनावी भाषणों से निकालकर ज़मीन पर उतारने की मांग करे। लोकतंत्र में सम्मान का मतलब अंध-समर्थन नहीं, बल्कि सजग भागीदारी है।

जमुई की तस्वीर बदल सकती है — लेकिन इसके लिए नेता और जनता, दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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