🚨 ब्रेकिंग न्यूज़: पटना में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई
5 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार हुए सहायक निदेशक, घर से मिले 15 लाख कैश
पटना से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने बिहार के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ नीति के तहत निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नियोजन भवन, पटना में पदस्थापित सहायक निदेशक परमजय सिंह को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।
यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सिस्टम के भीतर बैठे भ्रष्ट अधिकारी अब निगरानी के रडार से बच नहीं पा रहे।
💰 1.70 करोड़ के बजट के बदले 10 लाख की डिमांड
निगरानी विभाग को मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी अधिकारी परमजय सिंह ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को मिलने वाले 1.70 करोड़ रुपये के बजट आवंटन को जारी करने के एवज में 10 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
इस मामले में मुजफ्फरपुर निवासी ओम प्रकाश ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बिना “चढ़ावा” दिए फाइल आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया गया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निगरानी विभाग ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया।
🚗 पार्किंग में दबिश, कार में बैठे ही दबोचा गया
पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार, जैसे ही आरोपी अधिकारी ने 5 लाख रुपये की पहली किस्त ली, निगरानी विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई की।
यह गिरफ्तारी नियोजन भवन की उत्तर दिशा वाली पार्किंग में की गई, जहां परमजय सिंह रिश्वत की रकम लेकर अपनी कार में बैठने ही वाले थे।
निगरानी डीएसपी पवन कुमार के नेतृत्व में टीम ने मौके पर ही उन्हें धर दबोचा। रिश्वत की रकम मौके से बरामद कर ली गई और आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
🏠 कंकड़बाग स्थित आवास पर छापेमारी, 15 लाख नकद बरामद
गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम ने आरोपी के पटना के कंकड़बाग स्थित आवास पर छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को 15 लाख रुपये नकद, साथ ही निवेश से जुड़े कई अहम दस्तावेज हाथ लगे।
निगरानी सूत्रों के अनुसार, यह रकम आय से अधिक संपत्ति की ओर इशारा करती है। अब मामले की जांच को और विस्तारित किया जा रहा है और संपत्ति के स्रोतों की गहन पड़ताल की जा रही है।
🕵️♂️ क्या बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी जांच?
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब शिकायतकर्ता ने यह दावा किया कि रिश्वत की रकम में से एक बड़ा हिस्सा निदेशक (नियोजन एवं प्रशिक्षण) सुनील कुमार-1 तक भी जाना था।
हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन निगरानी विभाग इस एंगल से भी जांच कर रहा है। यदि आरोप सही पाए गए, तो आने वाले दिनों में और बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
🔥 सवाल सिस्टम पर: भ्रष्टाचार मुक्त बिहार या सिर्फ नारा?
एक ओर सरकार युवाओं को रोजगार देने और कौशल विकास को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसी विभाग के अधिकारी करोड़ों के बजट आवंटन के बदले लाखों की उगाही करते पाए जा रहे हैं।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि
क्या भ्रष्टाचार वाकई खत्म हो रहा है या सिर्फ चुनिंदा मामलों में कार्रवाई दिख रही है?













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