उत्तरकाशी में देर रात महसूस हुए भूकंप के हल्के झटके, कुछ देर के लिए दहशत में आए लोग; किसी नुकसान की सूचना नहीं
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपद Uttarkashi में रविवार देर रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे कुछ समय के लिए स्थानीय लोगों में हल्की दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार रात करीब 11:29 बजे अचानक धरती में हल्का कंपन महसूस हुआ। हालांकि झटके बेहद हल्के थे, लेकिन रात के सन्नाटे में कंपन महसूस होते ही कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए।
जिला आपदा कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का प्रभाव बहुत मामूली था और इसकी तीव्रता इतनी कम थी कि इसे रिक्टर पैमाने पर स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया जा सका। प्रशासन के अनुसार जिले के किसी भी क्षेत्र से जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। स्थिति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की घबराने वाली बात नहीं है।
भूकंप के झटके महसूस होने के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने तुरंत स्थिति की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि कंपन बहुत हल्का था और इससे किसी भी तरह की क्षति नहीं हुई।
पिछले साल भी महसूस किए गए थे कई झटके
स्थानीय लोगों के अनुसार, 2025 में भी उत्तरकाशी जिले में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए थे। जनवरी 2025 के दौरान करीब एक सप्ताह के अंतराल में लगभग आठ बार धरती में कंपन दर्ज किया गया था। उस समय भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर दो से तीन के बीच दर्ज की गई थी। लगातार झटके महसूस होने के कारण कई दिनों तक लोग दहशत के माहौल में रहे थे और रात में भी सतर्क रहने लगे थे।
इसके अलावा हाल के समय में 26 जनवरी की रात करीब 10:05 बजे भी जिले में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। हालांकि उस दौरान भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई थी।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है उत्तरकाशी
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण उत्तरकाशी और आसपास के इलाके भूकंप के लिहाज से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल किए जाते हैं। समय-समय पर यहां हल्के भूकंपीय झटके महसूस होना आम बात मानी जाती है।
1991 का विनाशकारी भूकंप आज भी याद
उत्तरकाशी जिले में भूकंप का इतिहास भी काफी गंभीर रहा है। 20 अक्टूबर 1991 को यहां 6.6 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था, जिसे 1991 Uttarkashi earthquake के नाम से जाना जाता है। इस भूकंप ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। उस समय 700 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि पांच हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हजारों घर और इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक जनजीवन प्रभावित रहा था।
आज भी उस भूकंप की याद स्थानीय लोगों के मन में गहराई से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि जब भी हल्का कंपन महसूस होता है, लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आते हैं।
प्रशासन की अपील: घबराएं नहीं, सतर्क रहें
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के हल्के झटकों से घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर लोगों को भूकंप से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक भी करता रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।












Leave a Reply