यह विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि साजिशन हत्या है?
देश में हाल के वर्षों में हुई कुछ विमान और हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि क्या ये हादसे वास्तव में दुर्घटनाएँ थीं, या फिर इनके पीछे कोई गहरी साज़िश छिपी हुई है।
गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के खिलाफ खुलकर खड़ा होना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं माना जाता। हाल के दिनों में अजीत पवार और भाजपा के रिश्तों में खटास की खबरें सामने आई थीं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, अजीत पवार दोबारा अपनी मूल पार्टी एनसीपी में लौटकर अपने चाचा शरद पवार के साथ जाने की तैयारी में थे। यह बात भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को रास नहीं आ रही थी। वहीं मुंबई मेयर की कुर्सी को लेकर भी अजीत पवार और भाजपा के बीच खींचतान की बात कही जा रही थी।
इसके अलावा, अजीत पवार पर सिंचाई मंत्री रहते हुए विदर्भ में लगभग 25,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोप लगते रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन आरोप है कि उस कथित घोटाले की रकम पर भाजपा के कुछ नेताओं की नजर थी।
बताया जाता है कि मौत से कुछ दिन पहले अजीत पवार ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उनके पास भाजपा नेताओं से जुड़े भ्रष्टाचार की कई फाइलें हैं, जिनमें लगभग 110 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज़ शामिल हैं। इसके महज़ तीन-चार दिन बाद ही एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई, जिससे शंकाएँ और गहरी हो गईं।
ऐसी ही एक घटना पिछले साल जून में अहमदाबाद में सामने आई थी, जब एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ और उसमें विजय रुपाणी की मौत हो गई। दावा किया गया कि वह एक बड़े ज़मीन घोटाले का खुलासा करने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया।
वहीं 2021 में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर क्रैश में मृत्यु भी आज तक कई सवाल छोड़ जाती है। कुछ रिपोर्ट्स और चर्चाओं में कहा गया कि वह अग्निवीर योजना के विरोध में थे, और इसी वजह से उनकी मौत को भी संदिग्ध माना गया।
इसके अलावा कई जज, वकील और अन्य प्रभावशाली लोग, जो कथित तौर पर सत्ता के बड़े नेताओं से नाराज़ थे, समय से पहले इस दुनिया से चले गए—जिससे इन घटनाओं को लेकर संदेह और गहराता है।
मांग उठ रही है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हो।
इन घटनाओं की CBI जांच कराई जाए और पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो, ताकि देश की जनता को सच्चाई पता चल सके और लोकतंत्र पर विश्वास बना रहे।













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