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लखीसराय में बिजली विभाग पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप, भाजपा जिलाध्यक्ष ने डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग

लखीसराय में बिजली विभाग पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप, भाजपा जिलाध्यक्ष ने डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग

लखीसराय। जिले में बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लखीसराय जिला अध्यक्ष दीपक कुमार ने विद्युत विभाग के सहायक अभियंता निशांत कुमार पर ग्रामीण इलाकों में कथित रूप से अवैध वसूली, दबाव बनाकर जुर्माना वसूलने और दुर्व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उन्होंने जिला पदाधिकारी (डीएम), लखीसराय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

छापेमारी के नाम पर वसूली का आरोप

जिलाध्यक्ष ने अपने ज्ञापन में कहा है कि चानन प्रखंड सहित लखीसराय के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की ओर से छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। आरोप है कि इन छापेमारियों के दौरान टीम बनाकर गांवों में पहुंचा जा रहा है और आम ग्रामीणों को बिजली चोरी के नाम पर डराया-धमकाया जा रहा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि कई मामलों में बिना पर्याप्त जांच या स्पष्ट साक्ष्य के ही भारी-भरकम आर्थिक दंड थोपे जा रहे हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रामीणों से मौके पर ही राशि जमा कराने का दबाव बनाया जाता है। भुगतान नहीं करने की स्थिति में बिजली कनेक्शन काटने, केस दर्ज करने या कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। इससे ग्रामीणों में भय और असंतोष का माहौल बन गया है।

महिलाओं के साथ अमर्यादित व्यवहार की शिकायत

मामले को और गंभीर बनाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर छापेमारी के दौरान महिलाओं के साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शिकायतें पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों के माध्यम से लगातार मिल रही हैं। यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि कानून और सामाजिक मूल्यों के भी विरुद्ध है।

डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

भाजपा की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को पद से हटाने की भी मांग की गई है, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो सके।

इसके अतिरिक्त, अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में की गई छापेमारी और वसूली की भी समीक्षा करने की बात कही गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

आंदोलन की चेतावनी

भाजपा नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ग्रामीणों के साथ किसी भी प्रकार की अन्यायपूर्ण कार्रवाई या ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि प्रशासन द्वारा समयबद्ध और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से ग्रामीणों की आवाज उठाई जाएगी और जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर कार्यालय तक विरोध दर्ज कराया जाएगा।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को किस तरह लेता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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