पटना: बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अहम और लंबे समय से लंबित मुद्दा अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी एक महत्वपूर्ण पत्र में राज्य के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालयाध्यक्षों (लाइब्रेरियन) की बहाली प्रक्रिया को लेकर शिक्षा विभाग को आवश्यक और त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
यह पत्र 10 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस विषय को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और बहाली प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करते हुए जल्द से जल्द उचित कदम उठाए जाएं। यह मामला माननीय विधान परिषद सदस्य Jeevan Kumar द्वारा उठाया गया था, जिसमें उन्होंने स्कूलों में लाइब्रेरियन के पदों की लंबे समय से खाली स्थिति पर चिंता जताई थी।
मुख्यमंत्री सचिवालय ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि प्राप्त पत्र के आधार पर पूरी गंभीरता से विचार करते हुए ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि जो भी कदम उठाए जाएं, उनकी विस्तृत जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री सचिवालय को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि पूरे मामले की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।
गौरतलब है कि बिहार के कई माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वर्षों से पुस्तकालयाध्यक्ष के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण छात्रों को पुस्तकालय सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में लाइब्रेरी की भूमिका केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह छात्रों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
इस निर्देश के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस दिशा में तेजी दिखाएगी और बहाली प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो न केवल हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी।
स्थानीय शिक्षकों और अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लाइब्रेरियन की नियुक्ति से स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा और छात्रों को पाठ्यपुस्तकों के अलावा अतिरिक्त ज्ञानवर्धक सामग्री तक भी आसानी से पहुंच मिल सकेगी।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सचिवालय का यह निर्देश शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग इस दिशा में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाता है, और कब तक यह बहुप्रतीक्षित बहाली प्रक्रिया धरातल पर उतरती है।













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