यौन अपराधों के आरोपी और विवादास्पद वित्तीय कारोबारी Jeffrey Epstein की मौत को कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उसके कथित आपराधिक नेटवर्क और प्रभाव के नए-नए पहलू समय-समय पर सामने आकर दुनिया को चौंका रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (United States Department of Justice) द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के एक विस्तृत जखीरे ने यह संकेत दिया है कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की जटिलताओं और खामियों का कथित तौर पर लाभ उठाकर कई विदेशी महिलाओं को अमेरिका में रोके रखा।
इमिग्रेशन सिस्टम का कथित दुरुपयोग
दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने कुछ महिलाओं के वीज़ा स्टेटस को बनाए रखने या बहाल कराने के लिए कई तरह के रास्ते तलाशे। इनमें छात्र वीज़ा, राजनीतिक शरण और यहां तक कि कथित रूप से फर्जी विवाह जैसे उपाय शामिल थे। जांच से जुड़े कागज़ात में यह भी सामने आया कि उसने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले को एक रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि संबंधित महिलाओं का अमेरिका में रहना वैध दिखाया जा सके।
इसी कड़ी में Columbia University के डेंटल स्कूल का नाम भी सामने आया। दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने अपने प्रभाव का उपयोग कर एक महिला—करीना शुलियाक—को ट्रांसफर छात्र के रूप में दाखिला दिलाने में मदद की। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि शुलियाक की शैक्षणिक पृष्ठभूमि पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी, फिर भी उसे प्रवेश मिल गया। जब उसके वीज़ा से जुड़ी समस्याएं सामने आईं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उसे आश्वस्त करने वाले संदेश भेजे गए।
करीना शुलियाक और कथित फर्जी विवाह
इस पूरे प्रकरण में एपस्टीन की करीबी सहयोगी के रूप में उभरीं करीना शुलियाक का नाम प्रमुखता से सामने आया। वर्ष 2013 में उनका वीज़ा स्टेटस संकट में था। आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए एक कथित योजना बनाई गई, जिसके तहत शुलियाक ने एक अमेरिकी नागरिक महिला—जेनिफर—से विवाह किया। बताया जाता है कि जेनिफर पहले से ही एपस्टीन के नेटवर्क से जुड़ी थी।
दस्तावेजों के अनुसार, इस विवाह के बाद शुलियाक को ग्रीन कार्ड प्राप्त हुआ और 2018 में वह अमेरिकी नागरिक बन गईं। नागरिकता मिलने के बाद दोनों के बीच तलाक हो गया। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह विवाह केवल इमिग्रेशन अधिकारियों को भ्रमित करने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं।
बड़े नामों से संपर्क और दबाव की कोशिश
फाइलों में यह भी उल्लेख है कि एपस्टीन ने शुलियाक के वीज़ा मामलों को सुलझाने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों और वकीलों से संपर्क साधा। ब्रिटिश निवेशक Ian Osborne का नाम ईमेल संवाद में सामने आया, जिनके बारे में दावा किया गया कि उनके पास ऐसे वकीलों का नेटवर्क है जिनकी पहुंच इमिग्रेशन अधिकारियों के उच्च स्तर तक है।
ईमेल में Greg Craig (ओबामा प्रशासन के पूर्व व्हाइट हाउस काउंसिल) और Alejandro Mayorkas (वर्तमान होमलैंड सुरक्षा सचिव) के नामों का भी जिक्र मिलता है। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में इन व्यक्तियों की किसी प्रत्यक्ष संलिप्तता का ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावशाली नामों का उल्लेख कई बार दबाव की रणनीति के रूप में भी किया जाता है।
राजनीतिक शरण का विकल्प
जब छात्र वीज़ा को लेकर स्थिति जटिल होती गई, तो वकीलों ने यह संकेत दिया कि वीज़ा अवधि से अधिक समय तक रुकना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। इसके बाद राजनीतिक शरण के विकल्प पर भी विचार किया गया। दस्तावेज बताते हैं कि एपस्टीन ने अपने कानूनी सलाहकारों से यह पूछा था कि क्या शरण का आवेदन छात्र वीज़ा की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। यह दर्शाता है कि संबंधित महिलाओं को अमेरिका से बाहर जाने से रोकने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता तलाशा जा रहा था।
व्यापक नेटवर्क और प्रशासन पर सवाल
ये खुलासे एक बार फिर यह प्रश्न उठाते हैं कि किस प्रकार धन, संपर्क और प्रभाव का उपयोग कर एक व्यक्ति कथित रूप से जटिल और सख्त माने जाने वाले इमिग्रेशन सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। फर्जी विवाह, शैक्षणिक दाखिले और कानूनी प्रक्रियाओं का आक्रामक उपयोग—ये सभी उस बड़े तंत्र का हिस्सा बताए जा रहे हैं, जिसके जरिए एपस्टीन महिलाओं पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करता था।
हालांकि कई लोग, जिनके नाम दस्तावेजों में सामने आए हैं, एपस्टीन से किसी भी प्रकार के संबंध पर खेद जता चुके हैं या दूरी बना चुके हैं, लेकिन ये फाइलें अब भी अमेरिकी प्रशासन और न्याय व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
एपस्टीन की मौत के बाद भी उसके कथित नेटवर्क और प्रभाव के खुलासे यह संकेत देते हैं कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि सत्ता, संपर्क और संस्थागत प्रक्रियाओं की कमजोरियों से जुड़ा एक व्यापक तंत्र हो सकता है—जिसकी परतें अब भी खुल रही हैं।













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