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पंचवटी धाम, पतनेश्वर महादेव मंदिर (मलयपुर, जमुई) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: न्यास समिति भंग, जिलाधिकारी बने अस्थायी न्यासधारी

पंचवटी धाम, पतनेश्वर महादेव मंदिर (मलयपुर, जमुई) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: न्यास समिति भंग, जिलाधिकारी बने अस्थायी न्यासधारी

जमुई जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र पंचवटी धाम स्थित पतनेश्वर महादेव मंदिर, मलयपुर के प्रबंधन को लेकर बिहार हिंदू धार्मिक न्यास परिषद ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। परिषद द्वारा जारी आदेश के अनुसार मंदिर की वर्तमान न्यास समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। साथ ही, जमुई के जिला पदाधिकारी श्री नवीन (भा.प्र.से.) को इस मंदिर का अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया है। अब मंदिर की समस्त प्रशासनिक, वित्तीय और प्रबंधकीय जिम्मेदारियां सीधे जिला प्रशासन की निगरानी में संचालित होंगी।

यह निर्णय बिहार हिंदू धार्मिक न्यास परिषद, पटना द्वारा निर्गत पत्रांक-2751, दिनांक 25 फरवरी 2026 के माध्यम से लिया गया है। परिषद के इस आदेश के अनुसार, मलयपुर स्थित पतनेश्वर महादेव मंदिर (निबंधन संख्या–3587) की संपूर्ण चल-अचल संपत्ति, मंदिर परिसर के रख-रखाव, पूजा-पाठ की व्यवस्थाओं तथा अन्य प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी अब अस्थायी रूप से जिलाधिकारी के अधीन रहेगी। परिषद का उद्देश्य मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, अनुशासन और प्रशासनिक सुचारुता सुनिश्चित करना बताया गया है।

समिति गठन से विवाद तक की पूरी पृष्ठभूमि

मंदिर प्रबंधन को लेकर उत्पन्न विवाद की पृष्ठभूमि पिछले कुछ वर्षों से जुड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), जमुई के प्रस्ताव पर बिहार हिंदू धार्मिक न्यास परिषद ने अधिसूचना संख्या-34, दिनांक 4 अप्रैल 2024 के माध्यम से मंदिर के संचालन के लिए 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया था। इस समिति को प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए अस्थायी आधार पर कार्य करने की अनुमति दी गई थी।

हालांकि, समिति के गठन के बाद से ही इसके कार्यकलापों को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें सामने आने लगीं। इसी क्रम में समिति के सचिव श्री राजीव कुमार पांडेय के विरुद्ध एक आपराधिक मामले की जानकारी परिषद को प्राप्त हुई। बताया गया कि उनके खिलाफ कोतवाली थाना कांड संख्या 12/2006 के तहत एक आपराधिक मुकदमा दर्ज है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परिषद ने पत्रांक-2810, दिनांक 22 जनवरी 2025 के माध्यम से उनसे स्पष्टीकरण मांगा था।

परिषद को प्राप्त स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद मामले की विस्तृत जानकारी के लिए पत्रांक-1630, दिनांक 8 सितंबर 2025 के जरिए अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई से भी मंतव्य मांगा गया। हालांकि, परिषद के अनुसार इस संबंध में अपेक्षित रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी।

नई समिति गठन की मांग और अवधि विस्तार

इसी बीच, मंदिर प्रबंधन को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ने लगा। 19 दिसंबर 2025 को स्थानीय नागरिकों के एक समूह ने परिषद के समक्ष आवेदन देकर मंदिर के लिए नई न्यास समिति गठित करने की मांग की। इस आवेदन पर विचार करते हुए परिषद ने आदेश संख्या-2490, दिनांक 20 जनवरी 2026 के माध्यम से मौजूदा समिति की अवधि को पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया था

लेकिन यह विस्तार भी विवादों को शांत नहीं कर सका। समिति के कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रहीं और मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे।

नए आरोपों के बाद परिषद की कार्रवाई

मामले में नया मोड़ तब आया जब खुशबू पांडेय द्वारा 10 फरवरी 2026 को बिहार हिंदू धार्मिक न्यास परिषद को एक आवेदन सौंपा गया। इस आवेदन में वर्तमान न्यास समिति के कार्यों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में मंदिर की व्यवस्थाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए गए।

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए परिषद ने पत्रांक-2664, दिनांक 16 फरवरी 2026 के माध्यम से समिति से पुनः स्पष्टीकरण मांगा। समिति द्वारा दिए गए उत्तर का परीक्षण करने के बाद परिषद ने यह पाया कि प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है और इससे उठे प्रश्नों का समुचित समाधान नहीं हो पाया है।

धारा-33 के तहत लिया गया निर्णय

इन सभी परिस्थितियों, शिकायतों और प्रशासनिक विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए बिहार हिंदू धार्मिक न्यास परिषद ने बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-33 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए कठोर प्रशासनिक कदम उठाया। परिषद ने पूर्व में जारी विस्तार आदेश संख्या-2490, दिनांक 20 जनवरी 2026 को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।

इसके साथ ही मंदिर की मौजूदा न्यास समिति को भंग करते हुए जिला पदाधिकारी, जमुई श्री नवीन (भा.प्र.से.) को इस न्यास का अस्थायी न्यासधारी नियुक्त कर दिया गया है।

प्रशासन ने पारदर्शिता और व्यवस्था सुधार का दिया भरोसा

जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कदम मंदिर के प्रशासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब मंदिर की समस्त संपत्ति, आय-व्यय, पूजा-पाठ की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से संबंधित सभी कार्यों की निगरानी जिला प्रशासन के स्तर पर की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि मंदिर की धार्मिक मर्यादा, परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि मंदिर से जुड़ी सभी गतिविधियां विधिसम्मत, पारदर्शी और सुचारु रूप से संचालित हों।

पंचवटी धाम स्थित पतनेश्वर महादेव मंदिर जमुई जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिषद और जिला प्रशासन की यह पहल मंदिर प्रबंधन में स्थिरता और व्यवस्था कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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