बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय: राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद नीतीश कुमार के इस्तीफे की तैयारी, भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनना लगभग तय
बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। लंबे समय से राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे जल्द ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य को एक नया मुख्यमंत्री मिलेगा। हालांकि सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल दल इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने के पक्ष में नहीं हैं और इसे एक व्यवस्थित राजनीतिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 9 अप्रैल के आसपास नए राज्यसभा सदस्यों को शपथ दिलाई जानी है। इस समय-सारणी को देखते हुए माना जा रहा है कि अभी लगभग एक महीने का समय राजनीतिक समीकरणों को अंतिम रूप देने में लगाया जाएगा। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) दोनों अपने-अपने स्तर पर संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति तय करेंगी।
विधायक दल की बैठकों से तय होगा नया नेतृत्व
सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले भाजपा और जदयू दोनों पार्टियां अपने-अपने विधायक दल की बैठक बुलाएंगी। इन बैठकों में दोनों दल अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे। इसके बाद एनडीए के सभी घटक दलों की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें गठबंधन के विधायक दल का नेता चुना जाएगा।
जैसे ही एनडीए विधायक दल का नेता तय हो जाएगा, उसके बाद मुख्यमंत्री Nitish Kumar औपचारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद गठबंधन का नया नेता राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगा और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को रामनवमी (26 मार्च) तक पूरा करने की कोशिश की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो बिहार में पहली बार भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा।
भाजपा का मुख्यमंत्री, जदयू के दो डिप्टी सीएम!
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि नई सरकार में सत्ता का नया संतुलन देखने को मिल सकता है। संभावित फॉर्मूले के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाएगा, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद मिल सकते हैं। इसके जरिए गठबंधन में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
32 मंत्रियों के साथ बन सकती है पूर्ण मंत्रिमंडल वाली सरकार
करीब तीन महीने पहले जब नई सरकार का गठन हुआ था तब 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। लेकिन इस बार चर्चा है कि एक फुल फ्लैज्ड मंत्रिमंडल बनाया जाएगा जिसमें कुल 32 मंत्री शामिल हो सकते हैं।
संभावित शक्ति संतुलन इस प्रकार हो सकता है—
- भाजपा से 14 मंत्री
- जदयू से 14 मंत्री
- Lok Janshakti Party (Ram Vilas) से 2 मंत्री
- Hindustani Awam Morcha से 1 मंत्री
- Rashtriya Lok Morcha से 1 मंत्री
माना जा रहा है कि इस बार दोनों प्रमुख दलों द्वारा कई नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल इस विषय पर कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बच रहा है।
स्पीकर और गृह विभाग को लेकर खिंच सकती है रस्साकशी
सरकार के गठन से पहले ही सत्ता संतुलन को लेकर कुछ अहम पदों पर खींचतान की संभावना भी जताई जा रही है। जदयू के प्रदेश स्तर के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पार्टी ने विधानसभा स्पीकर पद और गृह विभाग पर अपनी दावेदारी जताई है।
वर्तमान व्यवस्था में मुख्यमंत्री पद जदयू के पास है, जबकि विधानसभा स्पीकर का पद भाजपा के पास है। इसके अलावा मौजूदा सरकार में उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने गृह विभाग अपने पास रखा हुआ है। जदयू का तर्क है कि जब मुख्यमंत्री पद भाजपा को मिलेगा तो इन महत्वपूर्ण पदों पर उसका दावा बनता है।
हालांकि भाजपा इन दोनों पदों को अपने पास ही रखना चाहती है। पार्टी का मानना है कि गृह विभाग सरकार की प्रशासनिक मजबूती के लिए बेहद अहम है, जबकि विधानसभा स्पीकर का पद राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में भाजपा इन पदों को छोड़ने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री पद के लिए दो बड़े नाम चर्चा में
बिहार की नई सरकार में मुख्यमंत्री पद को लेकर फिलहाल दो प्रमुख नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं।
1. सम्राट चौधरी: सामाजिक समीकरण के लिहाज से मजबूत दावेदार
मौजूदा उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। वे कोइरी (कुशवाहा) समाज से आते हैं, जबकि Nitish Kumar कुर्मी समुदाय से हैं। बिहार की राजनीति में इन दोनों जातियों के समीकरण को “लव-कुश” समीकरण कहा जाता है।
राज्य में कोइरी और कुर्मी समुदाय की कुल आबादी लगभग 7 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है, जिसमें कोइरी लगभग 4.21 प्रतिशत और कुर्मी करीब 2.87 प्रतिशत हैं। यही सामाजिक आधार लंबे समय तक नीतीश कुमार की राजनीति का मजबूत आधार रहा है। यदि भाजपा सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाती है तो इस सामाजिक समीकरण को अपने पक्ष में साधने की कोशिश कर सकती है।
सम्राट चौधरी के पास प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव भी काफी है। वे राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री रहे थे और बाद में जदयू तथा भाजपा दोनों सरकारों में मंत्री पद संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे उपमुख्यमंत्री के पद पर हैं और भाजपा संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली को भी भाजपा की रणनीति के अनुकूल माना जाता है। विपक्षी नेताओं—विशेषकर Lalu Prasad Yadav और Tejashwi Yadav—पर उनके तीखे हमले अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं।
हालांकि उनकी राह में एक चुनौती भी है। सम्राट चौधरी पहले राजद और जदयू में रह चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए। इस वजह से पार्टी के कुछ पुराने नेता उन्हें “आयातित भाजपाई” मानते हैं और उनका विरोध भी करते रहे हैं।
2. विजय सिन्हा: संघ और शीर्ष नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा
दूसरे मजबूत दावेदार के रूप में मौजूदा उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha का नाम सामने आ रहा है। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी माने जाते हैं।
विजय सिन्हा 2010 से लगातार लखीसराय विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस दौरान वे मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। मौजूदा सरकार में वे उपमुख्यमंत्री हैं और एक सख्त प्रशासक की छवि बना चुके हैं।
हालांकि उनके सामने एक राजनीतिक चुनौती यह भी है कि वे भूमिहार समुदाय से आते हैं, जिसे बिहार की राजनीति में अपेक्षाकृत छोटी आबादी वाला सवर्ण वर्ग माना जाता है। पिछले तीन दशकों से बिहार की राजनीति में पिछड़े वर्गों का दबदबा रहा है, इसलिए भाजपा इस समीकरण को ध्यान में रखकर फैसला ले सकती है।
EBC चेहरे से भी चौंका सकती है भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा कई राज्यों में मुख्यमंत्री चयन को लेकर अप्रत्याशित फैसले लेती रही है। इसलिए यह भी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी किसी अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के नेता को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को चौंका सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के पटना दौरे के दौरान कुछ EBC विधायकों के साथ अलग से बैठक भी हुई थी, जिससे इस अटकल को और बल मिला है।
जदयू में डिप्टी सीएम के लिए ये नाम चर्चा में
अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा को जाता है तो जदयू के दो नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
पहला नाम Nishant Kumar का है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि Nitish Kumar सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाकर अपने बेटे को आगे ला सकते हैं। हालांकि निशांत कुमार अब तक राजनीति से काफी हद तक दूर रहे हैं, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद उनकी सक्रियता बढ़ी है।
दूसरा प्रमुख नाम वरिष्ठ जदयू नेता Vijay Kumar Chaudhary का है। उन्हें जदयू में नीतीश कुमार का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। वे लंबे समय से पार्टी की रणनीतिक बैठकों का हिस्सा रहे हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
विजय चौधरी अपनी शांत और मृदुभाषी शैली के लिए जाने जाते हैं। वित्त, शिक्षा, ग्रामीण कार्य, जल संसाधन और संसदीय कार्य जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व करने के अलावा वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
बिहार की राजनीति में नए युग की आहट
कुल मिलाकर, Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की प्रक्रिया के साथ ही बिहार की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन की भूमिका तैयार होती दिख रही है। लगभग दो दशकों तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सत्ता संतुलन और राजनीतिक समीकरण दोनों बदल सकते हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा आखिरकार किस चेहरे पर भरोसा जताती है और नई सरकार का नेतृत्व किसके हाथों में जाता है।












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