यह तस्वीर सिर्फ एक पल को कैद नहीं करती, बल्कि मेरे पूरे संघर्ष, मेरे साहस और मेरे सपनों की कहानी बयां करती है। यह उस जज़्बे की पहचान है, जिसने मुझे हर मुश्किल के सामने खड़ा रहना सिखाया।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। मैंने उस चुनावी मैदान में कदम रखा, जहां मेरे सामने एक ऐसा व्यक्ति था, जिसकी पहचान, प्रभाव और राजनीतिक पकड़ पहले से ही काफी मजबूत थी। लेकिन मेरी लड़ाई किसी एक व्यक्ति से नहीं थी। मेरी लड़ाई उस सोच के खिलाफ थी, जो आम लोगों की आवाज़ को दबा देती है। मेरी लड़ाई सच को सामने लाने की थी, अपने समाज को उसकी सच्चाई दिखाने की थी, और अपने क्षेत्र के हर उस इंसान की आवाज़ बनने की थी, जिसकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।
मेरे पास न बड़े संसाधन थे, न कोई मजबूत राजनीतिक समर्थन, और न ही कोई बड़ी ताकत। लेकिन मेरे पास जो था, वही मेरी सबसे बड़ी शक्ति बना — मेरे क्षेत्र के युवाओं का भरोसा, मेरे लोगों का दर्द, और बदलाव लाने की सच्ची नीयत। यही वो चीज़ें थीं, जिन्होंने मुझे हर कदम पर आगे बढ़ने की ताकत दी।
यह मेरा पहला चुनाव था, लेकिन मैंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा। मैंने कभी हार मानने या पीछे हटने के बारे में नहीं सोचा। चाहे सामने कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, मैंने अपने हौसले को कभी टूटने नहीं दिया। मैंने अपने सिद्धांतों, अपने आत्मसम्मान और अपने इरादों के साथ कभी समझौता नहीं किया।
मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने डरकर मैदान नहीं छोड़ा, मैंने अपना नाम वापस नहीं लिया। मैंने पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा, क्योंकि मेरे लिए यह सिर्फ जीत या हार का सवाल नहीं था। मेरा उद्देश्य इससे कहीं बड़ा था — अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाना, लोगों की आवाज़ को बुलंद करना, और अपने बिहार के लिए एक सच्ची प्रतिनिधि बनना।
आज भी मैं उसी जुनून और उसी दृढ़ संकल्प के साथ खड़ी हूँ। यह चुनाव मेरे लिए अंत नहीं था, बल्कि एक नई शुरुआत थी — एक ऐसे सफर की शुरुआत, जो मेरे अंतिम सांस तक जारी रहेगा।
मैं अपने लोगों के लिए, अपने समाज के लिए, और अपने बिहार के लिए हमेशा खड़ी रहूंगी। मैं हर समस्या के खिलाफ आवाज़ उठाऊंगी, हर अन्याय के खिलाफ लड़ूंगी, और तब तक नहीं रुकूंगी जब तक बदलाव की एक नई कहानी नहीं लिख दी जाती।













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