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शराबबंदी कानून के नाम पर अवैध वसूली: जमुई में तीन होमगार्ड जवान गिरफ्तार, ₹16,000 की ठगी का खुलासा

शीर्षक: भ्रष्टाचार पर जिला पदाधिकारी का कड़ा प्रहार। अवैध वसूली को लेकर वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए सदर अस्पताल के आरोपी फार्मासिस्ट की सेवा समाप्त और प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश। जमुई। जिले में पारदर्शी, संवेदनशील और भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए जिला पदाधिकारी श्री नवीन (भा.प्र.से.) ने सदर अस्पताल के संविदा फार्मासिस्ट दयानंद प्रसाद पर अवैध लेन-देन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जिला पदाधिकारी ने आरोपी फार्मासिस्ट की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने तथा उनके विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू करने का आदेश सिविल सर्जन को दिया है। विदित हो कि विगत दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें फार्मासिस्ट दयानंद प्रसाद को अनैतिक रूप से पैसे का लेन-देन करते हुए देखा गया था। इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला पदाधिकारी ने त्वरित जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक तौर पर सिविल सर्जन द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण में संबंधित कर्मी का पक्ष संतोषजनक और तर्कसंगत नहीं पाया गया, जिसके उपरांत जिला पदाधिकारी ने तीन सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया। जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में संबंधित फार्मासिस्ट को भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग का स्पष्ट रूप से दोषी पाया। जांचोपरांत संयुक्त जांच प्रतिवेदन समर्पित करते हुए आरोपी दयानंद प्रसाद के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और संविदा समाप्त करने की अनुशंसा की गई। जांच प्रतिवेदन के मन्तव्यों के आधार पर जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को आरोपी दयानंद प्रसाद के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत अविलंब प्राथमिकी दर्ज करने और उनकी संविदा सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का अंतिम आदेश दिया। इस कार्रवाई के माध्यम से जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर अक्षम्य होगा और जिला प्रशासन इस पर 'जीरो टॉलरेंस' के तहत निरंतर कार्य कर रहा है। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से जहां भ्रष्ट एवं सरकारी कार्यों में बाधक तत्वों में हड़कंप है, वहीं आम जनमानस ने जिला प्रशासन की इस पारदर्शिता और सुचिता की सराहना की है।

जमुई जिले से एक बार फिर भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनो थाना क्षेत्र के अंतर्गत डुमरी उत्पाद विभाग चेकपोस्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा अवैध वसूली किए जाने की घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में ला खड़ा किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मामले में तीन होमगार्ड जवान—सूर्यमणि कुमार, नवीन कुमार और आशीष कुमार—को दोषी पाए जाने के बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने शराबबंदी कानून का भय दिखाकर निर्दोष यात्रियों से अवैध रूप से पैसे वसूले।

यह घटना 21 अप्रैल की बताई जा रही है। उस दिन गिरिडीह निवासी श्यामसुंदर यादव अपने कुछ साथियों के साथ एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए यात्रा कर रहे थे। जैसे ही उनका वाहन डुमरी चेकपोस्ट पर पहुंचा, वहां मौजूद जवानों ने वाहन को रोककर नियमित जांच के नाम पर ब्रेथ एनालाइजर से उनकी जांच की।

आरोप है कि जांच के दौरान जवानों ने यात्रियों पर शराब सेवन का झूठा आरोप लगाया और उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। इसके बाद मामला रफा-दफा करने के नाम पर उनसे पैसों की मांग की गई। भय और दबाव के माहौल में यात्रियों को मजबूर होकर पैसे देने पड़े।

बताया जा रहा है कि कुल ₹16,000 की अवैध वसूली की गई, जिसमें ₹9,500 ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए और ₹5,500 नकद लिए गए। बाद में पीड़ितों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने पर मामले की जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान आरोप सही पाए जाने पर संबंधित तीनों होमगार्ड जवानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह घटना न सिर्फ कानून के दुरुपयोग को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शराबबंदी जैसे संवेदनशील कानून का इस्तेमाल किस तरह कुछ लोग निजी लाभ के लिए कर रहे हैं। ऐसे मामलों से आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था पर कमजोर होता है, जो कि किसी भी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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